भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। 16 अगस्त 2018 को उन्होंने आखिरी सांस ली। वाजपेयी 1996 में लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चली। फिर 9 मार्च 1998 को भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन को जीत मिली, दूसरी बार बने प्रधानमंत्री। अपनी सरकार के दौरान उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। आइए जानते हैं उनकी सरकार की ओर से लिये गए फैसले और उपलब्धियां।
भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाना
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने दुनिया के तमाम शक्तिशाली देशों के विरोध के बावजूद 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। यह परमाणु परीक्षण इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को छुआ। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ़ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना
भारत के चार बड़े महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजेक्ट) की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में की गई। इस परियोजना के अंतर्गत दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था।
पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में 19 फरवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी खुद पाकिस्तान यात्रा पर गए और तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंधों को मधुर बनाने के लिए एक नई शुरुआत की।
कारगिल युद्ध
वाजपेयी की इस यात्रा के कुछ ही समय पश्चात पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने भारत के कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ कर कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतरराष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्रवाही को अंजाम देते हुए भारतीय क्षेत्र को पाकिस्तानी सैनिकों और उग्रवादियों के चंगुल से मुक्त कराया। इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए भारतीय सेना ने अगाध शौर्य और जज्बे का परिचय दिया। इस घटना के बाद पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य पर पहुंच गए।

