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Monday, 13 August 2018

देवरिया सेक्स रैकेट के पर्दाफाश पर एडीजी के सवालों में उलझे एसपी


देवरिया के बालगृह बालिका कांड की विवेचना व अधूरी तैयारियों पर एडीजी क्राइम संजय ¨सघल ने पुलिस अधीक्षक पर तंज कसा है। उन्होंने एसपी रोहन पी कनय से कई ऐसे सवाल किए, जिस पर वह निरुत्तर हो गए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी भी जताई। विवेचना को कब्जे में लेने के बाद एसआइटी ने सभी ¨बदुओं पर नए सिरे से पड़ताल शुरू की, जिसमें छापेमारी के दौरान लापरवाही, विवेचक द्वारा काटे गए पर्चे, पूछताछ में पुलिस की ओर से चूक आदि शामिल है।

शनिवार दोपहर एडीजी क्राइम, पुलिस अधीक्षक देवरिया को अपनी गाड़ी में बैठाकर स्टेशन रोड संस्था पर पहुंचे। जांच के दौरान उनकी नजर संस्था के बगल में स्थित सीसीटीवी और बगल के होटल के कैमरों पर पड़ी। उन्होंने पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय से पूछा कि क्या पर्दाफाश करने से पहले पुलिस ने इन कैमरों की सीसीटीवी फुटेज देखी थी, फुटेज में तो लग्जरी गाड़ियां साफ दिख जाती। हालांकि सूत्रों का कहना है कि फुटेज में कुछ गाड़ी दिखाई दी हैं, लेकिन वह होटल में आए ग्राहकों की बताई जा रही है।

आसपास के दुकानदारों ने एडीजी को गाड़ी नहीं आने की जानकारी दी। संस्था में रहने वाली बिहार की नाबालिग लड़की जिसके बयान पर देवरिया बालगृह बालिका कांड का पर्दाफाश हुआ उस पर भी एडीजी संजय ¨सघल ने आपत्ति जताई। उन्होंने पूछताछ करते हुए सवाल किया कि संस्था से भागकर लड़की पुलिस के पास पहुंची। महिला एसओ, सीओ समेत अन्य अधिकारियों ने उसका बयान दर्ज किया। सेक्स रैकेट, बालश्रम जैसे गंभीर अपराध संस्था में कराए जाने की जानकारी दी, क्या पुलिस के जांच अधिकारियों ने उसके आरोपों की तस्दीक की। एडीजी के सवाल पर एसपी रोहन पी कनय अगल-बगल झांकने लगे। मतलब साफ था कि एसआइटी जांच में पुलिस की पटकथा में भारी चूक निकलने वाली है। नाबालिग के आरोपों की तस्दीक करने की बजाए पुलिस ने जल्दबाजी में घटना का पर्दाफाश कर दी। एसपी की ओर से इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी नहीं दी गई, इस पर भी एडीजी ने नाराजगी जताई।
अब तक मामले की विवेचना शहर कोतवाल विजय ¨सह गौर के पास थी। पर्दाफाश होने के बाद उन्होंने केस के संबंध में कई पर्चे काटे हैं। नाबालिग के बयान के आधार पर संस्था संचालक गिरिजा त्रिपाठी, मोहन त्रिपाठी, अधीक्षक कंचनलता को जेल भेजने का उल्लेख है। संस्था पर सेक्स रैकेट संचालित करने का गंभीर आरोप है, जिस पर पुलिस के पास कोई साक्ष्य नहीं है। विवेचक के पास न तो वह लग्जरी कार है, न ही वह लड़कियां जिनको गलत काम में इस्तेमाल किया गया हो। एसआइटी इस पर भी सख्त है। पुलिस की ओर से दर्ज 161 के बयान पर भी तीन सदस्यीय टीम ने सवाल खड़ा किया है।